दिल्ली लॉक्ड डाउन है।
मैं इसका कैदी हूँ।
अपनी खुशी के लिए।
अपने परिवार के लिए,
अपने पड़ोस के लिए,
अपने मित्र के लिए,
अपनी कॉलोनी के लिए, अपने जनपद के लिए,
अपने राज्य के लिए ,
अपने देश के लिए,
अपने महाद्वीप के लिए,
सारे विश्व के लिए ,
क्योंकि मैं एक भारतीय हूँ।
क्योंकि मैं एक मानव हूँ
मानवता के लिए।
हमारी परंपरा है
अतिथि देवो भवः।
लेकिन मैं मानवता के लिए
तोड़ता हूँ ये परंपरा
थोड़ी दे के लिए भूलता हूँ
अपना धर्म।
नहीं खोलूंगा दरवाजे
इस मानव जाति के दुश्मन के लिए।
मानव है तो मानवता हैं।
मानवता को बचाना है?
तो कोविड-१९ को समूल
नष्ट करना है।
आओ हम सब मिलकर
इस लॉक्ड डाउन का करते है
स्वागत।
हमें घबराना नहीं है
दूर से ही मिलकर रहना है।
ध्यान रखना हैं कि कोई भूखा
सोये नही।
साथ छोड़े नहीं।
विषधर पी लेना विष
मानवता के लिए
रोकना कोरोना
अमर बन नीलकंठ।
क्योंकि ये कोरोना है
हमें कुछ भी करना है
लेकिन रोकना है कोरोना
नहीं है रोना।
मैं इसका कैदी हूँ।
अपनी खुशी के लिए।
अपने परिवार के लिए,
अपने पड़ोस के लिए,
अपने मित्र के लिए,
अपनी कॉलोनी के लिए, अपने जनपद के लिए,
अपने राज्य के लिए ,
अपने देश के लिए,
अपने महाद्वीप के लिए,
सारे विश्व के लिए ,
क्योंकि मैं एक भारतीय हूँ।
क्योंकि मैं एक मानव हूँ
मानवता के लिए।
हमारी परंपरा है
अतिथि देवो भवः।
लेकिन मैं मानवता के लिए
तोड़ता हूँ ये परंपरा
थोड़ी दे के लिए भूलता हूँ
अपना धर्म।
नहीं खोलूंगा दरवाजे
इस मानव जाति के दुश्मन के लिए।
मानव है तो मानवता हैं।
मानवता को बचाना है?
तो कोविड-१९ को समूल
नष्ट करना है।
आओ हम सब मिलकर
इस लॉक्ड डाउन का करते है
स्वागत।
हमें घबराना नहीं है
दूर से ही मिलकर रहना है।
ध्यान रखना हैं कि कोई भूखा
सोये नही।
साथ छोड़े नहीं।
विषधर पी लेना विष
मानवता के लिए
रोकना कोरोना
अमर बन नीलकंठ।
क्योंकि ये कोरोना है
हमें कुछ भी करना है
लेकिन रोकना है कोरोना
नहीं है रोना।
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