कोविड-19 और सेवा निवृत्त का एक साल
सेवा निवृत्त का एक साल करीब करीब पूर्ण हो गया। शुरू में ऐसा लगता था कि समय स्थिर से हो गया आगे बढ़ ही नही रहा है। धीरे धीरे सब सामान्य हो गया क्योंकि समय का उपयोग करना आ ही गया। इस मध्य सुख और दुख दोनों स्थितियों से सामना भी किया। छोटी बेटी का विवाह किया और पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुक्त हुआ। वही बड़े भाई की मृत्यु से बहुत ही दुखः हुआ क्योंकि मुझे अब बड़े भाई रूपी उस वृक्ष की छाया कभी भी नसीब नहीं होगी जिस छाया में मैंने अपनी बाल्यवस्था से प्रौढ़ावस्था जी।
सेवा निवृत्त के एक साल पूरे होने के अंतिम दिनों में एकांतवास और सामाजिक दूरी का पालन कर रहा हूँ क्यों कि कोरोना से बचना है अपने लिए, अपने परिवार के लिए , अपने पड़ोसियों के लिये ,अपने मित्रों के लिए , अपने देश लिए , विश्व के लिए और अपने दुश्मन के लिए ...... अरे मेरा तो कोई भी नहीं दुश्मन है। हाँ एक दुश्मन है मेरा ,आपका , हम सभी का और मानवता का।
इस दुश्मन को हराने के लिए ज़रूरी है एकांत वास सामाजिक दूरी बनाते हुए अपने परिवार के साथ। वह है। .........कोरोना.........
हम सब अर्जुन है क्योंकि हम सबने यह कला ( एकांतवास) तो माँ के गर्भ में नौ माह रहकर सीखी है। यह समस्या ही नही है।
हम सबने जीना है
मेरी भी जिजीविषा है क्योंकि मुझे अगली पीढ़ी/ नाती पोतों को सीता राम, राधा कृष्ण, ब्रह्मा विष्णु महेश, शिवाजी , चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह ,गाँधी , और #कोरोना# की भी कहानी सुनानी है।
और..…हाँ ....आप मित्रों और.... फ़ेसबुक मित्रो .....से रूबरू भी होना है इसलिए एकांतवास ज़रूरी है।
अच्छा फिर मार्च 2021 के आखरी में फिर मिलते है
मैं तो चला अपने परिवार के साथ एकांतवास में।
आप भी ना.......
सेवा निवृत्त का एक साल करीब करीब पूर्ण हो गया। शुरू में ऐसा लगता था कि समय स्थिर से हो गया आगे बढ़ ही नही रहा है। धीरे धीरे सब सामान्य हो गया क्योंकि समय का उपयोग करना आ ही गया। इस मध्य सुख और दुख दोनों स्थितियों से सामना भी किया। छोटी बेटी का विवाह किया और पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुक्त हुआ। वही बड़े भाई की मृत्यु से बहुत ही दुखः हुआ क्योंकि मुझे अब बड़े भाई रूपी उस वृक्ष की छाया कभी भी नसीब नहीं होगी जिस छाया में मैंने अपनी बाल्यवस्था से प्रौढ़ावस्था जी।
सेवा निवृत्त के एक साल पूरे होने के अंतिम दिनों में एकांतवास और सामाजिक दूरी का पालन कर रहा हूँ क्यों कि कोरोना से बचना है अपने लिए, अपने परिवार के लिए , अपने पड़ोसियों के लिये ,अपने मित्रों के लिए , अपने देश लिए , विश्व के लिए और अपने दुश्मन के लिए ...... अरे मेरा तो कोई भी नहीं दुश्मन है। हाँ एक दुश्मन है मेरा ,आपका , हम सभी का और मानवता का।
इस दुश्मन को हराने के लिए ज़रूरी है एकांत वास सामाजिक दूरी बनाते हुए अपने परिवार के साथ। वह है। .........कोरोना.........
हम सब अर्जुन है क्योंकि हम सबने यह कला ( एकांतवास) तो माँ के गर्भ में नौ माह रहकर सीखी है। यह समस्या ही नही है।
हम सबने जीना है
मेरी भी जिजीविषा है क्योंकि मुझे अगली पीढ़ी/ नाती पोतों को सीता राम, राधा कृष्ण, ब्रह्मा विष्णु महेश, शिवाजी , चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह ,गाँधी , और #कोरोना# की भी कहानी सुनानी है।
और..…हाँ ....आप मित्रों और.... फ़ेसबुक मित्रो .....से रूबरू भी होना है इसलिए एकांतवास ज़रूरी है।
अच्छा फिर मार्च 2021 के आखरी में फिर मिलते है
मैं तो चला अपने परिवार के साथ एकांतवास में।
आप भी ना.......
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