Wednesday, 8 April 2020

परिवर्तन-
1984 से 2019 मध्य।
लगभग तीन दशको से ज्यादा समय में।
जिंदगी किस तरह से बदलती है।
आशा निराशा के मंथन में
नये सपनों के साथ।
अज़ीज़ों से बिछुड़ने पर
जिन्दगी के नए हम सफर के साथ।
अंत फिर वही आड़ी तिरछी लकीरों के जाल में
नई चाँदनी रात की आस में।
विषधर चंद लम्हे खुशी के चुराने की कोशिश की
लेकिन पकड़े गए मोह और ममता के ज़ाल में।

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