कर्म पथ ,जीवन पथ
असीम अभिलाषाओं का अनंत राजपथ
आतप शुष्क बीज की नमता देती अंकुर
आर्ची की कल्पना भी उस पथ पर
दैदीप्त मान करती जीवन रस
दो रूप है अग्नि के
आर्ची और लपट
लपट करती तहस नहस
खँडहर का प्रतीक
आर्ची माध्यम सुर से पंचम सुर तक
अडिग निर्भय
उज्जवल करती जीवन पथ
दीपशिखा आत्मवत
चानन की खुसबू बिखेर यत्र तत्र सर्वत्र
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