Wednesday, 21 August 2013

मुस्कारने की भी अदा होतीं है

मुस्कारने की भी अदा होतीं है
इसमें खुदा की तौफीक छिपी होती है
दिल से निकली आवाज़
तो खुदा की आवाज होती है

त्रिलोक चन्द्र जोशी ' विषधर'

No comments:

Post a Comment