Monday, 22 July 2013

घन घन करते बादल ये बादल की शहनाई

घन घन करते बादल ये बादल की शहनाई
द्वार खड़े सैया तेरे तू क्यों बोराई 
खोल द्वार छोड़ हट 
पहचान अपने बालम की आ हट
खोल ऑंखें मन की 
महसूस कर चाहत उनकी 
ये वही है शहनाई 
जब डोली मैं सैय्या ने विदा तेरी कराई
मत शर्मा शमा है तू
अब सावन की शबनम बनजा 
छोड़ लाज 
अब बालम के दिल से लग जा
(त्रिलोक चन्द्र जोशी 'विषधर')

No comments:

Post a Comment